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जब नींद नहीं आँखों में - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
बेवजह रात को जब भी मुझे नींद नहीं आती है करवटें बदल बदल कर रात गुज़र जाती है। चादर की हर सिलवट तब, कोई कहानी अपनी, यों ही कह जाती है।