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देखा नहीं अभी तक तुमको  - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
देखा नहीं अभी तक तुमको पर रोज तुमको याद करते तुम में क्या कशिश है जो रोज तुमको याद करते देखा नहीं हाथ अभी तुम्हारा पर उसकी रेखा हम पढ़ लेते स्पर्श नहीं