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मैं लोकतंत्र हूँ। - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
मैं लोकतंत्र हूँ। निश्छल, मजबूत और सूझबूझ का सागर हूँ। सारा ज्ञान मेरे अंदर है विराजमान है, फिर भी न जाने प्राणी क्यों अज्ञान है? हमेशा की तरह फिर से मुझे