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हमको सपने सजाना जरुरी लगा - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
तुम मिली जब मुझे दुनिया की भीड़ में, अपनी सुध-बुध गवाना जरुरी लगा, आस जागने लगी प्रीत की शब तले, हमको सपने सजाना जरुरी लगा, नींद छिनी रात की दिन का