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हम सबकी जिम्मेदारी है : पिछड़े बालकों की समस्याएँ - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
विकास व्यक्ति की अनुवांसिक क्षमताओं एवं वातावरण के मध्य होनें वाली आंतरिक क्रिया का परिणाम होता है. बालक की अनुवांसिक क्षमताओं का विकास वातावरण से ही होता है. इसके अतिरिक्त स्वयं वातावरण भी बालक के विकास की दिशा, दशा और गति निर्धारित करनें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.