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मैं कैसे करूँ गर्व ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
मैं कैसे करूँ गर्व, सर्व उसका जब रहा; दर्पण में रूप लखके कहूँ, मेरा कब रहा ! है कथानक उसी का, चर्म उसका ही रहा; हर मर्म पीछे झाँका वही, कर्त्ता वो