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हिंसा से बढ़ता सामाजिक अलगाव एवं अकेलापन - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
ललित गर्ग आज देश ही नहीं, दुनिया में हिंसा, युद्ध एवं आक्रामकता का बोलबाला है। जब इस तरह की अमानवीय एवं क्रूर स्थितियां समग्रता से होती है तो उसका समाधान