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अवैज्ञानिक क्यों हो गये हाकिंग? - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
-डॉ.सुभाष राय भगवान एक ऐसी कल्पना है, जो हमारे संस्कारों में इस तरह बसी हुई है, कि अनायास उसकी असम्भाव्यता के बारे में नास्तिक भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं