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आत्महत्या की फसल - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
बाबा मायाराम किसानों के लिए नई फसल का आना किसी त्यौहार से कम नहीं होता है। यह उसकी सारी जमा पूंजी, अथक परिश्रम और आशाओं की एक नई किरण के रूप में अभिव्यक्त