pravakta.com
ग़ज़ले- शादाब जफर ‘‘शादाब’’
शादाब जफर ‘‘शादाब’’ ग़ज़ले ये आजमा के देख लिया इस जहान में रूसवाइ्रयो का डर है फक्त झूठी शान में में गुनहागार हूँ मेरी बख्शिश को ऐ खुदा हाफिज कुरान