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आज़ादी : एक शब्द कितने मायने !  - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
देवेंद्रराज सुथार आज़ादी की कीमत पिंजरे में कैद तोता ही जान सकता है। जिसके पंख फड़फड़ाकर स्वर्ण सलाखों से टकरा रहे हैं। जिसकी आत्मा कैद की गुलामी से आज़ाद