pravakta.com
खोई कलम को खोज ले - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
धर्म की छत तले अधर्म का कैक्टस पले, जातिवाद का कहर और जिहाद का ज़हर चखकर आज कबीर की वाणी मुख हो गई, ना जाने कबीर की कलम कहांँ खो गई। ना जाने कबीर की कलम