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एक चिट्ठी, धर्माचार्यों के नाम - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
संदर्भ: मूर्ति विसर्जन पर प्रधानमंत्री जी के मन की बात आदरणीय आचार्यवर, आम धारणा है कि मुख्य रूप से उद्योग, सीवेज और शहरी ठोस कचरा मिलकर हमारी नदियों को