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दर्द से ऊपर निकलना चाहिये ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
दर्द से ऊपर निकलना चाहिये; छिपा जो आनन्द लखना चाहिये ! झाँकना सृष्टि में सूक्ष्म चाहिये; चितेरे बन चित्त से तक जाइये ! सोचना क्यों हमको इतना