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'मुल्क हिंदुस्तान हूँ....' - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
कुलदीप विद्यार्थी झाड़ियों पर वस्त्र, लोहित देह से हेरान हूँ, कल मैं कब्रिस्तान था औ' आज मैं शमशान हूँ। कौनसी वहसत भरी हैं आपके मस्तिष्क में, पाँव पर कल ही