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संघर्ष कभी शब्दों के मोहताज नहीं रहे - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
दिलीप बीदावत शब्द जब सियासत के लिए आफत बन जाते हैं या शब्द की अवधारणा से उजागर समाज के किसी वर्ग विषेष के जीवन स्तर के सुधार में कामयाबी हासिल नहीं होती