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वर्ण धर्म और भक्ति : हरि को भजे सो हरि का होई - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
डॉ. चंदन कुमारी क्षिति, जल, पावक, गगन और समीर– इन पंचभूतों की समनिर्मिति है समग्र सृष्टि फिर भेद-भाव वाली द्वैतबुद्धि का औचित्य कैसा ! गोस्वामी तुलसीदास