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बदलते परिवेश में बदलती पत्रकारिता - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
कल देश गुलाम था पत्रकार आजाद, लेकिन आज देश आजाद है और पत्रकार गुलाम। देश में गुलामी जब कानून था तो पत्रकारिता की शुरुआत कर लोगों के अंदर क्रांति को पैदा