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औपनिवेशिकता की बेड़ियाँ तोड़ने का समय - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
- लोकेन्द्र सिंह हमें स्वाधीनता जरूर 15 अगस्त, 1947 को मिल गई थी, लेकिन हम औपनिवेशिक गुलामी की बेडिय़ाँ नहीं तोड़ पाए थे। अब तक हमें औपनिवेशिकता