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“आर्यसमाज के विद्वानों, नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को निःस्वार्थ भाव एवं निर्भीकतापूर्वक वेदों का प्रचार करना चाहिये” - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। महर्षि दयानन्द के आगमन से लोगों को यह ज्ञात हुआ कि विद्या व ज्ञान भी सत्य एवं असत्य दो प्रकार का हो सकता है। हम बचपन में