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आरती का दम, बेटी नहीं हुनर में कम - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
हेमेन्द्र क्षीरसागर एक जमाना था जब बेटियों को घर की चार दीवारियों में कैद रखकर चुल्हा-चक्की तक सीमित रखा जाता था, पढाई-लिखाई तो उनके लिए दूर की कौडी थी।