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क्या वाकई हम वैसे हैं, जैसा कि खुद को कहते या समझते हैं ?? - Pravakta | प्रवक्‍ता.कॉम : Online Hindi News & Views Portal of India
राजकुमार झांझरी दुनिया के लोग स्व-विवेक के बजाय औरों के थोपे गये विचारों के अनुरुप अपना जीवन संचालित करने का प्रयास करते हैं और यही उनकी दुख-तकलीफों का मुख्य कारण है। वे कभी इस बात की सच्चाई को जानने की कोशिश नहीं करते कि जिन्हें वे फॉलो कर रहे हैं अथवा फॉलो करते आ रहे हैं, उन्होंने जो कुछ कहा है, वह कितना सच है,