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क्या वाकई हम वैसे हैं, जैसा कि खुद को कहते या समझते हैं ?? - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
राजकुमार झांझरी दुनिया के लोग स्व-विवेक के बजाय औरों के थोपे गये विचारों के अनुरुप अपना जीवन संचालित करने का प्रयास करते हैं और यही उनकी दुख-तकलीफों का