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असफल रैनेसां का प्रतीक हैं गालियां - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी हिन्दी में रैनेसां का शोर मचाने वाले नहीं जानते कि हिन्दी में रैनेसां असफल क्यों हुआ ? रैनेसां सफल रहता तो हिन्दी समाज गालियों का