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शाहबुद्दीन के नाम एक खत - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
संजय चाणक्य " लिखू कुछ आज यह वक़्त का तकाजा है ! मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है !! गिर पडते है मेरे आसू ,मेरे ही कागज पर ! लगता है कि कलम मे स्याही का