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रहते हुए भी हो कहां - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
-गोपाल बघेल 'मधु'- (मधुगीति १५०६२१) रहते हुए भी हो कहाँ, तुम जहान में दिखते कहाँ; देही यहाँ बातें यहाँ, पर सूक्ष्म मन रहते वहाँ । आधार इस संसार के, उद्धार