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अभिलाषा - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
आओ धरती को सजाएं, हम एक उपवन की तरह, इसके हर अंश को महकाएं हम मधुबन की तरह, आओ धरती को सजाएं........... एक धरती है जो बिन मांगे, अपना सब देती, हमने छलनी