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आग बुझती जा रही है बस धुंआ सा रह गया - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
आग बुझती जा रही है बस धुंआ सा रह गया राजनीती देख लगता, ये तमाशा रह गया, जात में बंटते दिखे, धर्मों के ठेकेदार सब आदमी उनकी जिरह में बस ठगा सा रह