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अब पहले वाली कोई बात न रही ! - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
बस इतना इल्म कर लो अंधेरें के रहनुमाओं ! आफताब के आने पर कोई रात न रही !! ऐतबार किस पर करें इस शहर में हम 'मनीष' ! आदमी अब भरोसे वाली जात न रही !!