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अचानक उष्ण धार जब छोड़े ! - Pravakta | प्रवक्‍ता.कॉम : Online Hindi News & Views Portal of India
अचानक उष्ण धार जब छोड़े, ध्यान में मुझको वे रहे जोड़े; गीले आवरण देख नेत्र मुड़े, इससे उद्विग्न वे हुए थोड़े ! बनाई मुद्रा मुख की कुछ अद्भुत, अजीव भोंह से