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विनाश बनाम विकास और छात्र राजनीति - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
डा. कुंदनलाल चौधरी की पंक्तियां हैं :- ‘‘तुम चकित करते हो मुझे, मेरे देश ! तुम एक भयंकर ‘गाजी’ को न केवल छूट दे देते हो जिसने वह विद्रोह भडक़ाया, तुम्हारे