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हरसिंगार - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
हरसिंगार की ख़ुशबू कितनी ही निराली हो चाहें रात खिले और सुबह झड़ गये बस इतनी ज़िन्दगानी है। जीवन छोटा सा हो या हो लम्बा, ये बात ज़रा बेमानी है,