pravakta.com
साहित्य, राजनीति और पत्रकारिता के एक सूर्य का अस्त होना  - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
मनोज कुमार मन आज व्याकुल है। ऐसा लग रहा है कि एक बुर्जुग का साया मेरे सिर से उठ गया है। मेरे जीवन में दो लोग हैं। एक दादा बैरागी और एक मेरे घर से जिनका