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अब तो पुराने दिन याद कर लेते है | - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
अब तो पुराने दिन याद कर लेते है |अपनी ख्वासियो के चराग बुझा देते है || कभी सोलह आने स्वपन सच होते थेअब तो एक आने भी सच नहो होते है || बस अब तो मन मसोस कर