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छलावा …
हवा थमी सी थी वक़्त ठहरा हुआ था मैं चल रही थी अनजानी राह पर कुछ भी तो नहीं था पास कोई भी तो नहीं था साथ! सोचती थी क्या ऐसा ही रहेगा हमेशा? अचानक ली वक़्त ने करवट और एक तूफ़ान आया.. हवा ज़ोरो…