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प्रणय-निवेदन - Femonomic
एक बार दे दे खुद को मुझको, मैं बहुत सँभाल कर रखूँगा तुझको मैं रख रहा हूँ गिरवी खुद को, तू बस खरीद ले बेमोल मुझको रात को मैं तेरा चाँद बनूँगा, सुबह को उगता सूरज जाड़ों की मैं धूप बनूँगा, भरी दोपहर की छाँव|