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~ खरोश…
~ खरोश… मेरी खाब में ही रूह काँप जाती है, हैरां हूँ कि तुम्हें नींद खूब आती है… लापरवाहियों से भी चराग बुझते हैं दीये सिर्फ आँधियाँ नहीं बुझाती हैं… हूँ शर्मसार मैं ख़ामोश हकमरानों से, …