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~ कहीं सवाल, कहीं जवाब…
हदों से गुज़र रहा हर हद पार कर रहा, कहीं से बन रहा तो कहीं से उखड़ रहा… इस क़दर अथाह, बेपनाह जैसे आसमान, दूर कहीं उतर रहा और कहीं चड़ रहा… गहराईओं में लुप्त, अचेत, खाली खंडहर, शान्त खाम…