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~ किताबें…
~ किताबें… किताबों की चादर किताबों का सिरहाना, किताबें ही ओड़ के सो जाती हूँ, किताबों की सी दिखती हूँ, किताबों का हुआ जो ज़िक्र फिर उनमें खो जाती हूँ… कल सुबह एक, दोपहर में दो और रात को देड़ ख़िताब…