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~ दोस्त…कहीं खो गए हैं…
मेरे कुछ दोस्त कहीं खो गए हैं, कुछ हिन्दू तो कुछ मुसलमान हो गए हैं, बुलाते थे जिन्हें ओये, अबे, साले, गोरे, काले, कुछ भगवे तो कुछ हरे हो गए हैं, मेरे कुछ दोस्त कहीं खो गए हैं… बड़े प्यारे थे…