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~ सरहद…
बहुत पानी बरसा उस रात, हर आँख नम और सैकड़ों दिलो में था ग़म, फिर दो चार दोपहर बाद ढल गयी होंगी यादें, सैकड़ों के ज़हन से… बाक़ी जो बुझे थे दिये, आज भी इक आग बन दिलों में जल रहे है, सूरज ढल ग…