whitecanvasblackmargins.com
~ आलोचना…
~ आलोचना… जब करो तुम कोई वजह से किसी की भी आलोचना, रोक लेना जिह्वा को अपनी और दिल से इतना सोचना… की तुम में कितनी खूबियां है तुम में कितने दोष हैं, लेना पकड़ कोना कोई और आँखों को…