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~ कबूतर…
आज अपनी छत के मैंने सारे कबूतर भगा दिए, दो चार नहीं थे पुरे साठ-सत्तर भगा दिये, उनके घोंसले को भी दूर नदी में बहा आया, कहीं लौट ना आयें इसलिए फासले बड़ा दिये… जगह खाली है अब तो सोच रहा…