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~ चश्मा…
सारा आसमान सर पर उठा रखा है, ना मालूम मैंने चश्मा कहाँ रखा है, दो आँखों से ज़माना बहुत देख लिया, दो और लगा ताज़ा नज़र को रखा है… काश दिल भी दूसरा लगा सकता मैं, पहले वाला तो टूट के बिखर…