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कैसा ये न्याय न्यास
हे इंद्रदेव, हे मेघराज तुम देवों के राजाधिराज राक्षस समाज ने अमृत मथ वचनानुकूल बाँटा तुमसे पर कैसा ये न्याय न्यास सत्ता की कैसी अंध प्यास तुम देवों की कमज़ोर शक्ति उतनी ही तेज़ चतुर भक्ति तुम पर आसक्…