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सत्ता की रात – कुछ कविताएँ
सत्ता की रात में हे उदारपंथियों पहचानो ये तुम्हीं हो तुम्हारा ही विकृत रूप है नशे में धुत्त तुमने कर दिखाया जो तुम्हें पहले कर दिखाना था सही दिमाग़ से बिन पगलाये तुम इसको कर सकते थे मगर तुम्हें हिम्…