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👥 टूटता यकीं।
जब आपको बार बार खुद अपने आप को अपने रिश्तों का एहसास करवाना पड़े। कि वह मेरा मित्र है, वह मेरे पिता जी, वह मेरी माया जी, या अरे हा वह मेरी पत्नी और बच्चे ही है। तो समझ जाना वह ड़ोर जिसे यकीन कहते है …