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खामोश एहसास।
भूतकालीन जीवन के कर्मों पर लगा कलंक; अपने जिस्म में बहते हुए लहू के आखरी कतरो से भी जब मिटा ना सके। हर बढ़ते कदम से खुद को जब हम और भी तन्हा महसूस करते गए।। हर आँसू बेमाने और ये ज़िंदगी, ये साँसे, ये…