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अहसास।
लहू ए ज़िगर चाहती है एक बग़ावत, हर एक जंजीर बाँधे जो गुलाम को गुलामी से। हर एक अहसास दबाए है जो जुल्मों सितम, दास्तां ए मौत अहसासों कि अपने, ख़ामोश अपने अहसासों से।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (…