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🍂 एहसास
हम जो थोड़ा सा मुस्कुरा क्या दिए वो समझ बैठे की महोबत है हमे। राह बर्बादियों के है राही एक हम ही तो नही, यह बहुत से अपना घर फूक कर बैठे है। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। 20/09/2018 at 10:13 am Vie…