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जारी है…(एक भाव निष्पाप!)
परन्तु मित्रो यह जितना सरल प्रतीत होता है उतना है नही, युगों युगों से हम मनुष्य हर एक नए बदलाव से कतराते रहे है। फिर भी जब भी कभी किसी महानुभव ने खुद के वास्तविक व्यक्तिव को स्वीकार कर खुद के व्यक्…